अथ श्री भगीरथ कथा
' अथ श्री भगीरथ कथा' "माय लार्ड ! भगीरथ का पिछली कई पीढ़ियों से व्यवस्था भंग करके अपनी मनमानी चलाने का इतिहास रहा है." न्यायालय में चहुँ ओर बड़ी गहमागहमी थी. आज एक महत्वपूर्ण पीआईएल जिसमे गंगाजल की पृथ्वी पर लाए जाने वाली मात्रा का निर्धारण होना था, की सुनवाई का अंतिम दिन था. पीआईएल दाखिल करने वाले वकील चिंतकानंद अपने हाथों में टंगी कानून की लगभग मुर्दा हालात की पुस्तक जैसे ही नजर आ रहे थे, बस उनकी आँखों की चमक ही उन्हें मुर्दों से अलग किए हुए थी. "और अपनी इस बात को सिद्ध करने के लिए मैं मिस्टर भगीरथ को अंतिम सुनवाई के लिए कटघरे में बुलाना चाहूँगा." "अनुमति है.." "तो मिस्टर भगीरथ, क्या ये सच है कि आपके परपरदादा राजा सगर पर एक निरीह घोड़े पर अत्याचार करने के कारण 'प्रीवेंशन ऑफ़ क्रुअलिटी टू एनिमल' के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था?" "पर वो तो हमारे परपरदादाश्री के अश्वमेघ यज्ञ का अश्व था और........." "मुकदमा तो था न भगीरथ जी ! फिर उनके बेटों पर ...